Combined Flakiness and Elongation Index: एक उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री भी तय मानकों के अनुसार होनी चाहिए| कंक्रीट में सबसे अधिक जगह लेने वाले कोर्स एग्रीगेट यानि रोड़ी के आकार के साथ उसकी बनावट (shape of aggregate) भी कंक्रीट की क्वालिटी पर असर डालती है| इसी बनावट को मानकों में ढालने के लिए flakiness index और elongation index का उपयोग किया जाता है| आइए जानते हैं क्या होता है flakiness index और elongation index और कैसे यह कंक्रीट में इस्तेमाल होने वाले एग्रीगेट की एक महत्वपूर्ण विशेषता मानी जाती है:
एग्रीगेट की बनावट, कंक्रीट की कार्यशीलता (Workability) प्रभावित करती है| मूल चट्टान (primary source of aggregate) के गुणों के साथ, क्रशर का प्रकार भी एग्रीगेट की शेप प्रभावित करता है| किसी वाटर/ सीमेंट अनुपात के लिए सीमेंट लागत के अनुसार देखा जाए तो गोल (round) एग्रीगेट को क्यूबिकल एग्रीगेट की तुलना अधिक प्राथमिकता दी जाती है क्यूंकि उसमें सीमेंट की मात्रा कम लगेगी| लेकिन क्यूबिकल एग्रीगेट में लगने वाला अधिक सीमेंट के कारण कंक्रीट की बड़ी हुई दबाव क्षमता और इस तरह के एग्रीगेट के उपयोग से इंटरलॉकिंग बनावट के आधार पर, लगने वाले अधिक सीमेंट की भरपाई हो जाती है|
हम कोर्स एग्रीगेट को उसकी शेप के आधार पर चार भागों में बाँट सकते हैं|
गोल (Rounded)
अनियमित या आंशिक रूप से गोल
कोणीय (Angular)
सपाट या परतदार (Flaky)
इस विषय पर बहुत विवाद रहा है कि राउंड एग्रीगेट और एंगुलर एग्रीगेट में से कौन बेहतर कंक्रीट देता है| असल में एंगुलर एग्रीगेट की सतह राउंड एग्रीगेट की सतह (texture) की तुलना अधिक खुरदरी होती है और इसके सतह का क्षेत्रफल (surface area) भी ज्यादा होता है जिस वजह से सीमेंट पेस्ट और एग्रीगेट के बीच अच्छी पकड़ बनती है| ज्यादा सरफेस एरिया होने से रफ़ टेक्सचर एंगुलर एग्रीगेट के इस्तेमाल से एक वर्काबिलिटी पाने के लिए ज्यादा पानी की जरुरत पड़ती है जिससे वाटर/सीमेंट अनुपात भी बढ़ जाता है| इसलिए एक तय वाटर/सीमेंट रेश्यो के लिए राउंड एग्रीगेट अधिक क्षमता प्रदान करते हैं|
आसान शब्दों में कह सकते हैं कि 0.4 से कम वाटर/सीमेंट रेश्यो के लिए क्रशड एग्रीगेट, राउंड एग्रीगेट की तुलना 38 प्रतिशत ज्यादा क्षमता प्रदान करते हैं| जैसे-जैसे हम वाटर-सीमेंट रेश्यो बढ़ाते हैं तो एग्रीगेट के सरफेस के खुरदरे होने का महत्व कम होता है और कंक्रीट की क्षमता सीमेंट पेस्ट पर निर्भर होने लगती है| 0.65 वाटर/सीमेंट रेश्यो तक कंक्रीट की क्षमता उसमें मौजूद राउंड एग्रीगेट या एंगुलर एग्रीगेट के होने से प्रभावित नहीं होती|
हाई स्ट्रेंथ कंक्रीट के मामले में एग्रीगेट का आकार (शेप) बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है, जहाँ कम वाटर/सीमेंट अनुपात की आवश्यकता होती है| ऐसे मामलों में बेहतर कार्य क्षमता के लिए क्यूबिकल शेप एग्रीगेट की आवश्यकता होती है| और सपाट(flaky) और लम्बे(elongated) एग्रीगेट का इस्तेमाल नहीं किया जाता| लेकिन कौन से एग्रीगेट को फ्लेकी और एलॉन्गेटेड कहेंगे? इसके लिए भारतीय कोड IS 2386 Part-I में फलकिनेस्स इंडेक्स और एलॉन्गेशन इंडेक्स को निकालने का तरीका बताया गया है|
उदहारण के तौर पर यदि हमने 06 किलोग्राम एग्रीगेट का सैंपल लिया और उसको IS 2386 Part-I में बताई सीव से पास कराया तो प्रत्येक सीव में बचे एग्रीगेट सैंपल को फलेकिनेस्स मेटल गेज या एलॉन्गेशन मेटल गेज से पास कराया जाता है| फिर नीचे बताई प्रक्रिया से फलेकिनेस्स इंडेक्स और एलॉन्गेशन इंडेक्स निकालते हैं|
Define Flakiness Index (फलेकिनेस्स इंडेक्स क्या है?)
परतदार या सपाट रोड़ी (flaky aggregate) कंक्रीट की व्यवहारिकता (workability), स्थायित्व (durability), दबाव क्षमता (strength) के साथ लगने वाले सीमेंट की मात्रा पर आपत्तिजनक प्रभाव डालता है| कम शब्दों में कहें तो फ्लेकी कोर्स एग्रीगेट कंक्रीट की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव डालता है|
भारतीय मानकों के अनुसार फलेकिनेस्स इंडेक्स (Flakiness Index), एग्रीगेट सैंपल का वह भार प्रतिशत है, जिनका न्यूनतम आयाम (dimension, मोटाई), औसत आयाम के 3/5th से कम है| फलेकिनेस्स टेस्ट 6.3 मिलीमीटर से छोटे आकार के एग्रीगेट के लिए लागू नहीं है|
फलेकिनेस्स इंडेक्स कैसे निकालें (How to find Flakiness Index)
- फलेकिनेस्स टेस्ट एक मेटल गेज का उपयोग करके किया जाता है|
- इस टेस्ट के लिए पर्याप्त एग्रीगेट सैंपल लेते हैं जिससे किसी भी भिन्न आकार के गिट्टियों के कम से कम 200 टुकड़ों का परिक्षण किया जा सके|
- मेटल गेज पर बारी-बारी से मोटाई के लिए प्रत्येक गिट्टी को मापा जाता है|
- उसके बाद गेज से निकलने वाली गिट्टियों का वजन, 0.1 प्रतिशत की सटीकता से तौला जाता है|
- मेटल गेज के अलग-अलग मोटाई गेज से गुजरने वाली गिट्टियों का लिया गया वजन, कुल सैंपल के वजन की प्रतिशत संख्या के रूप में फलकिनेस्स इंडेक्स (Flakiness Index) द्वारा दर्शाई जाती है|
Flakiness Index = (Mass of Sample Passing the Slot of Flakiness Metal Gauge / Total Mass of Sample) x 100
Define Elongation Index (एलॉन्गेशन इंडेक्स क्या है)
एग्रीगेट के अलग-अलग बताए गए आकारों में एक शेप एलॉन्गेटेड (लम्बी) भी होती है| 10 से 15 प्रतिशत से अधिक लम्बे कणों की उपस्थिति आमतौर पर कंक्रीट के लिए सही नहीं मानी जाती| लेकिन इसके लिए मानकों में कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई हैं|
एलॉन्गेशन इंडेक्स (Elongation Index), एग्रीगेट सैंपल का वह भार प्रतिशत है, जिनका अधिकतम आयाम (लम्बाई), औसतन आयाम से 1.8 गुना अधिक होती है|एलॉन्गेशन टेस्ट 6.3 मिलीमीटर से छोटे आकार के एग्रीगेट के लिए लागू नहीं है|
एलॉन्गेशन इंडेक्स कैसे निकालें (How to find Elongation Index)
- एलॉन्गेशन टेस्ट एक मेटल गेज का उपयोग करके किया जाता है|
- इस टेस्ट के लिए पर्याप्त एग्रीगेट सैंपल लेते हैं जिससे किसी भी भिन्न आकार के गिट्टियों के कम से कम 200 टुकड़ों का परिक्षण किया जा सके|
- एलॉन्गेशन टेस्ट में मेटल गेज पर लम्बाई के लिए हर गिट्टी को व्यक्तिगत रूप से मापा जाता है|
- एग्रीगेट के साइज अनुसार, (नीचे दी गई टेबल के अनुसार) उपयुक्त आकार की गिट्टी को मेटल गेज से गुजारा जाता है|
- एक आकार के सैंपल को जब मेटल गेज से गुजारते हैं, तो ना गुजरने वाले सैंपल का कम से कम 0.1 प्रतिशत सटीकता से वजन किया जाता है|
- मेटल गेज के अलग-अलग लम्बाई गेज से ना गुजरने वाली गिट्टियों का लिया गया वजन, कुल सैंपल के वजन की प्रतिशत संख्या के रूप में एलॉन्गेशन इंडेक्स (Elongation Index) द्वारा दर्शाई जाती है|
Elongation Index = (Mass of Sample Retained on Elongation Metal Gauge / Total Mass of Sample) x 100
भारतीय मानक केवल फलकिनेस्स इंडेक्स और एलॉन्गशन इंडेक्स की गणना करने की विधि का व्याख्यान करते हैं और इनकी कोई सीमा निर्धारित नहीं करते| ब्रिटिश स्टैण्डर्ड में फलकिनेस्स इंडेक्स की लिमिट, नेचुरल एग्रीगेट के लिए 50, और क्रशड एग्रीगेट के लिए 40 बताता है|
Flakiness Index and Elongation Index Lab Test Report Format
Flakiness Index and Elongation Index Lab Test Report 20mm Sample
यह सैंपल रिपोर्ट केवल उदहारण के तौर पर बताई गई है:
Flakiness Index and Elongation Index Lab Test Report 10mm Sample
यह सैंपल रिपोर्ट केवल उदहारण के तौर पर बताई गई है:
Combined Flakiness and Elongation Index Test
IS 383 के अनुसार combined flakiness and elongation index की जांच करने के लिए एग्रीगेट के सैंपल का पहले भारतीय मानक IS 2386-Part I के अनुसार फलेकिनेस्स इंडेक्स निकालना होगा| उसके बाद उस सैंपल से फ्लेकी एग्रीगेट निकालकर बचे हुए एग्रीगेट सैंपल का एलॉन्गेशन इंडेक्स टेस्ट करना होता है| फिर दोनों मान फलकिनेस्स इंडेक्स और एलॉन्गेशन इंडेक्स को जोड़ कर आई वैल्यू को हम कंबाइंड फलेकिनेस्स एंड एलॉन्गेशन इंडेक्स कहेंगे| भारतीय मानक IS383 अनुसार combined flakiness and elongation index की वैल्यू 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए| हालाँकि इसका आखिरी निर्णय इंजीनियर पर ही छोड़ा गया है|










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