Vaishno Devi Yatra 2023: जम्मूकश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश के कटरा शहर में माता वैष्णो देवी का प्रसिद्ध मंदिर है| त्रिकुटा पहाड़ियों में स्थित इस मंदिर में लाखों भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं| ऐसा माना जाता है कि पूजा और आरती के समय कई देवियाँ माता रानी के सम्मान में पवित्र गुफा में आती हैं| भक्तों का मानना है कि माता वैष्णो स्वयं भक्तों को यहाँ पहुँचने के लिए बुलाती हैं| यदि आपको भी माता रानी का बुलावा आया है तो यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी आप यहाँ प्राप्त कर सकते हैं:
जय माता दी
वैष्णो देवी माँ अपने भक्तों की हर मुरादें पूरी करती है| त्रिकुटा पर्वत की पवित्र गुफा में माँ वैष्णो देवी के दर्शन तीन प्राकृतिक रूप से निर्मित चट्टानों के रूप में होते हैं जिन्हें पिंडी के नाम से जाना जाता है| यह पिंडी देवी के तीन रूपों को महाकाली, महासरस्वती और महा लक्ष्मी के रूप में प्रकट करती हैं| वैष्णो देवी मंदिर में हर साल एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु आते हैं|
माता वैष्णो देवी का मंदिर कहाँ स्थित है (Mata Vaishno devi temple located at)
प्रसिद्ध माता वैष्णो देवी का मंदिर जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के रियासी जिले के कटरा शहर में स्थित है| जम्मू शहर से कटरा शहर की दुरी मात्र 45 किलोमीटर है, जहाँ रोड या रेल के माध्यम से पहुंचा जा सकता है| रोड नेटवर्क से जम्मू से कटरा आने में 1 घंटा 15 मिनट का समय लगता है, वहीं रेलगाड़ी से यह दुरी उधमपुर के रास्ते आने के कारण 02 घंटे से अधिक का समय लेती है|
श्रीमाता वैष्णो देवी का मंदिर कटरा शहर में स्थित त्रिकुटा पहाड़ियों में है| माता वैष्णो देवी की यात्रा बाणगंगा चेक पोस्ट से शुरू होती है जहाँ सिक्योरिटी चेकिंग के बाद भक्त चढाई शुरू करते हैं| यह स्थान कटरा बस अड्डे से पैदल दुरी पर स्थित है (लगभग 1.5 किलोमीटर सीधा रास्ता) और रेलवे स्टेशन से (बस अड्डे के रास्ते होकर लगभग 03 किलोमीटर) यहाँ पहुँचने के लिए ऑटो सुविधा आसानी से उपलब्ध है|
माता वैष्णो देवी की चढाई कितने किलोमीटर है?
माता वैष्णो देवी की यात्रा देश की सबसे पवित्र और मुश्किल तीर्थ यात्रा मानी जाती है| माता के दरबार तक पहुँचने के लिए 12-13 किलोमीटर की कठिन चढाई करनी होती है| यह यात्रा बाणगंगा चेक पोस्ट, कटरा से माता के भवन तक की होती है| माता के दर्शन करने के बाद भैरों घाटी के दर्शन करने पर ही यात्रा पूरी मानी जाती है| माता वैष्णो देवी के भवन से भैरों घाटी तक की दुरी 1.5 किलोमीटर की है| इस प्रकार माता वैष्णो देवी की कुल यात्रा 14 किलोमीटर की होती है|
माता वैष्णो देवी यात्रा में कितना समय लगता है?
माता वैष्णो देवी की यात्रा में लगने वाला समय कई बातों पर निर्भर करता है| उनमें से सबसे पहला है यात्रा का साधन कि भक्त यात्रा पैदल कर रहा है या घोड़े, पालकी, पिट्ठू, बैटरी कार या हेलीकाप्टर से| यदि यात्री पैदल यात्रा कर रहा है तो बाणगंगा चेक पोस्ट से भवन तक जाने में 05 से 08 घंटे लगेंगे| इसमें मार्ग पर बाणगंगा, चरण पादुका और अर्द्धकुंवारी पड़ेगा| साल भर के माह अनुसार भी यात्रा में अलग-अलग समय लग सकता है| जहाँ नवरात्रियों में बहुत से भक्त दर्शन के लिए आते हैं वहीँ दिसंबर-जनवरी में ठंड के कारण यात्रा में कमी देखी जाती है|
माता वैष्णो देवी यात्रा पर्ची
माता वैष्णो देवी की यात्रा पर ट्रेक करने से पहले यात्रा पंजीकरण करवाना अनिवार्य है| बिना यात्रा पर्ची के बाणगंगा चेक पोस्ट से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाती| सभी यात्रियों का यात्रा रजिस्ट्रेशन निशुल्क किया जाता है| ट्रेन से आने वाले यात्री रेलवे स्टेशन पर यात्रा रजिस्ट्रेशन काउंटर से रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं| यात्रा रजिस्ट्रेशन काउंटर कटरा बस अड्डे पर भी उपलब्ध है| रजिस्ट्रेशन करवाने के 06 घंटे के भीतर बाणगंगा चेकपोस्ट क्रॉस करना होता है| यह यात्रा पर्ची भवन में भी चेक की जाती है| यात्रा पंजीकरण से यात्री को स्वतः किसी आकस्मिक दुर्घटना के लिए बीमा मिलता है|
इसके साथ ही यात्री पहले से किसी अन्य तारीख की ऑनलाइन यात्रा पर्ची श्रीमाता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की ऑफिसियल वेबसाइट में लॉगिन करके प्राप्त कर सकता है|
कैसे प्राप्त करें माता वैष्णो देवी ऑनलाइन यात्रा पर्ची
- ऑनलाइन यात्रा पर्ची प्राप्त करने के लिए सबसे पहले श्राइन बोर्ड की ऑफिसियल वेबसाइट www.maavaishnodevi.org पर लॉगिन होना पड़ेगा|
- पहली बार वेबसाइट विजिट करने वाले यात्रियों को New User? Sign Up पर क्लिक करके डिवोटी रजिस्ट्रेशन करना होता है| जहाँ कुछ बेसिक जानकारी भरके यात्री लॉगिन यूजरनाम और पासवर्ड बना सकता है|
- उसके बाद लॉगिन होकर यात्रा तारीख अनुसार और अधिकतम 04 यात्रियों की जानकारी भरके यात्रा पर्ची जनरेट की जा सकती है| जानकारी भरते समय दिया गया आई-डी कार्ड नंबर वाला पहचान पत्र यात्रा के दौरान साथ रखना अनिवार्य है|
- यात्रा पर्ची जनरेट करने के बाद उसका लिया गया प्रिंट आउट ही यात्रा पंजीकरण का प्रमाण है|
माँ वैष्णो देवी यात्रा का मार्ग
यात्रा आरम्भ से अर्द्धकुंवारी
माता वैष्णो देवी की पैदल यात्रा दो मार्गों से की जा सकती है| पहली बाणगंगा वाले पुराने रूट से या ताराकोट से बने नए मार्ग से| दोनों ही मार्ग अर्द्धकुंवारी पर जाकर मिलते हैं| जहाँ बाणगंगा से अर्द्धकुंवारी का मार्ग लगभग 06 किलोमीटर का है वहीँ ताराकोट से अर्द्धकुवांरी का मार्ग 7.5 किलोमीटर का है| दोनों ही मार्ग सीमेंट-कंक्रीट के पक्के रास्ते हैं| जहाँ अधिकतर यात्री बाणगंगा मार्ग से यात्रा करते हैं और भक्तों की चहल-पहल रहती है वहीँ ताराकोट मार्ग शांत है और घोड़ा रहित मार्ग है|
अर्द्धकुंवारी से भवन
अर्द्धकुवांरी में ही गर्भजून स्थित है जहाँ माँ वैष्णो देवी 09 महीने रही थी| अर्द्धकुंवारी से माता के दरबार की दुरी लगभग 6-7 किलोमीटर है| भवन तक पहुँचने के भी दो मार्ग हैं| पहला हिमकोटी मार्ग जो घोड़ा रहित है और इसी मार्ग पर अर्द्धकुंवारी से भवन के लिए बैटरी कार की सुविधा उपलब्ध है| दूसरा हाथीमत्था मार्ग जो सांझीछत से होकर गुजरता है| सांझीछत पर ही हेलिपैड स्थित है जहाँ से भवन की दुरी मात्र 02 किलोमीटर रह जाती है|
भवन से भैरों घाटी की दुरी
माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के बाद भक्तजन भैरों बाबा के दर्शन करने जाते हैं| माता के भवन से भैरों घाटी की दुरी 1.5 किलोमीटर है| यहाँ तक पहुँचने के लिए सीमेंट कंक्रीट के मार्ग के अलावा केबल कार सुविधा भी उपलब्ध है| केबल कार का किराया भवन से भैरों मंदिर तक आने-जाने का प्रति यात्री मात्र 100 रूपए है| एक तरफ के सफर में केवल 03 मिनट का समय लगता है| यह सेवा सुबह आठ बजे से शाम 05 बजे तक उपलब्ध रहती है और इसकी बुकिंग भवन से 300 मीटर दूर केबल कार बुकिंग काउंटर से कराई जाती है|
माता वैष्णो देवी यात्रा में चरण पादुका मंदिर
माता वैष्णो देवी यात्रा में जाने वाले तीर्थ यात्रियों के बीच चरण पादुका धार्मिक स्थल बहुत लोकप्रिय है| माना जाता है कि यह सफ़ेद मंदिर वह स्थान है जहाँ से माता वैष्णवी ने पीछे मुड़कर यह देखा था कि क्या उनका पीछा भैरों द्वारा अभी भी किया जा रहा है| चरण पादुका मंदिर में माता वैष्णो के पैरों के निशान चट्टान की स्लैब पर देखे जा सकते हैं|
माता वैष्णो देवी यात्रा में घोड़ा, पिठू, पालकी की सुविधा
श्रीमाता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने बाणगंगा, अर्धकुंवारी, भवन पर यात्रियों की सुविधा के लिए प्रीपेड घोड़ा, पिठू, पालकी की सर्विस उपलब्ध कराई है| इसका अर्थ है, कि भक्तों को घोड़ा, पिठू, पालकी करने के लिए किसी भी प्रकार का मोलभाव करने की आवश्यकता नहीं है|
माता वैष्णो देवी यात्रा हेलीकाप्टर से
माता वैष्णो देवी की यात्रा के लिए हेलीकाप्टर सेवा कटरा से सांझीछत और सांझीछत से कटरा तक उपलब्ध है| यह हवाई सफर मात्र 08 मिनट का होता है| कटरा हेलिपैड, कटरा बस स्टैंड से 02 किलोमीटर की दुरी पर उधमपुर रोड पर स्थित है| सांझीछत हेलिपैड से माता के भवन की पैदल यात्रा लगभग आधे घंटे (02 किलोमीटर) की है| इसके लिए पोनी, पालकी और पिठू सेवाएं भी उपलब्ध हैं| हेलीकाप्टर का किराया शुल्कों सहित एक तरफ (कटरा से सांझीछत या सांझीछत से कटरा) का 1800 रूपए है| हेलीकाप्टर सेवा की बुकिंग श्रीमाता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के साथ निजी कंपनी के माध्यम से भी कराई जा सकती है| 02 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए यह सेवा निशुल्क है, और उन्हें अपने अभिभावक की गोद पर बैठना होता है|
माता वैष्णो देवी में छोटे बच्चों के लिए सुविधा
माता वैष्णो देवी यात्रा के दौरान रास्ते में टॉयलेट सुविधा हर 300-400 मीटर पर उपलब्ध है| इसी के साथ छोटे बच्चों के लिए दूध (पाउडर वाला) श्राइन बोर्ड के बने रेस्टोरेंट पर मिल जाता है| बाणगंगा, अर्द्धकुंवारी, सांझीछत और भवन में बच्चों के लिए पिठू श्राइन बोर्ड द्वारा तय प्रीपेड रेट पर आसानी से मिल जाता है| उनके पास ट्राली (बच्चे की प्रैम) सुविधा भी रहती है|
माता वैष्णो देवी में बैटरी कार बुकिंग
वैष्णो देवी यात्रा के दौरान बैटरी कार की सुविधा अर्द्धकुंवारी से भवन तक और वापसी में भवन से अर्द्धकुंवारी तक उपलब्ध है| बैटरी कार में एक बारी में 07 लोग बैठ सकते हैं| बैटरी कार के लिए बुकिंग ऑन स्पॉट अर्द्धकुंवारी/भवन पर मिल जाती है| इसी के साथ बैटरी कार की ऑनलाइन बुकिंग श्रीमाता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की वेबसाइट पर भी कर सकते हैं|
कब करें श्रीमाता वैष्णो देवी यात्रा
श्रीमाता वैष्णो देवी की यात्रा साल के सभी दिन खुली रहती है| वर्ष के हर मौसम में माता रानी के दरबार में भक्तों का आना जारी रहता है| दिसंबर-जनवरी के महीने में अधिक ठंड के कारण साल के दूसरे महीनों की तुलना यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आती है| इसीलिए इस समय भवन की प्राकृतिक गुफा भी भक्तों के लिए खोल दी जाती है|

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