Tribal Pride Day 2022 Date | Birsa Munda Jayanti | जनजातीय गौरव दिवस

Tribal Pride Day 2022: भारत एक विविधताओं का देश है जहाँ अनेक प्रकार के धर्म एवं जाति के लोग "विविधता में एकता" का सन्देश देते हुए रहते हैं| अपने लम्बे इतिहास में भारत ने हर जाति-धर्म के महापुरुष देखे हैं जिन्होनें समाज और भारत के लिए अपनी अहम् भूमिका निभाई है| ऐसे ही स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे बिरसा मुंडा जिन्होनें अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी| भारत सरकार ने उनके जन्मदिवस के दिन को जनजातीय गौरव दिवस मनाए जाने की घोषणा की है| आइए जानते हैं ट्राइबल प्राइड डे यानि जनजातीय गौरव दिवस कब है (Tribal Pride Day is celebrated on) और क्या है इसका महत्त्व:  
 
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जनजातीय गौरव दिवस कब मनाया जाता है (Tribal Pride Day is celebrated on) 

जनजातीय गौरव दिवस यानि ट्राइबल प्राइड डे प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को मनाया जाता है| इसकी शुरुआत पिछले वर्ष 2021 में 15 नवंबर को ट्राइबल प्राइड डे मनाकर हुई| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 नवंबर, जनजातीय गौरव दिवस (ट्राइबल प्राइड डे) के रूप में घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी| सुचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने इसकी घोषणा करी थी| ट्राइबल प्राइड डे (जनजातीय गौरव दिवस) 15 नवंबर 2021 को बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया गया| यह दिन आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति को समर्पित है| 

मुंडा ने औपनिवेशक व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ी और ब्रिटिश दमन के खिलाफ एक आंदोलन का नेतृत्व किया| उन्होंने उलगुलान (क्रांति) का आह्वान किया| 
     

जनजातीय गौरव दिवस का उद्देश्य (Tribal Pride Day 2022) 

देश में रहने वाली जनजातियों ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपार योगदान दिया है| भारत सरकार ने जनजातियों और उनके द्वारा दिए गए योगदान को स्वीकार करने और आने वाली पीढ़ियों को देश के लिए उनके बलिदानों के बारे में जागरूक करने के लिए, 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाए जाने का निर्णय लिया था|   

बिरसा मुंडा कौन थे (Tribal Pride Day 2022) 

बिरसा मुंडा, मुंडा जनजाति के एक भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी, धार्मिक नेता और लोक नायक थे| बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश राज के दौरान 19वीं शताब्दी के अंत में बंगाल प्रेसीडेंसी के क्षेत्र में जो अब झारखण्ड कहलाता है, एक आदिवासी सहस्त्रब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया, जिससे वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए| 

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