जानिए क्या है RRTS Project | RRTS full Form | Rapid Rail Corridor and route

RRTS Project क्या है: 150 वर्षों से अधिक समय से भारतीय रेलवे यात्रियों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है| लेकिन समय की मांग और लोगों को सार्वजानिक परिवहन को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए भारत में जल्द ही रैपिड रेल दस्तक देने वाली है| दिखने में मेट्रो की तरह लगने वाली विश्व स्तरीय रैपिड रेल (आरआरटीएस) कई मायनों में भारतीय रेलवे और मेट्रो से अलग विशेषताएं रखती है| आइये जानते हैं क्या है RRTS Project, फुल फॉर्म (RRTS Full Form) और कहाँ से होकर जायेगी RRTS रैपिड रेल (Rapid Rail / RRTS Corridor Route): 

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क्या है RRTS का फुल फॉर्म (RRTS Full Form)

RRTS : Regional Rapid Transit System 

आरआरटीएस (RRTS Project) भारत में जल्द शुरू होने वाली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम है|    

आरआरटीएस प्रोजेक्ट क्या है (What is RRTS Project)

भारत सरकार, भारतीय रेलवे प्रणाली को उन्नत करने के लिए एक कदम आगे बढ़ा रही है| इस दिशा में, नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) ने देश का पहला आरआरटीएस रेलवे कोच (RRTS coach) 16 मार्च 2022 को पेश किया और 07 मई 2022 को आधुनिक गतिशीलता सुविधाओं से लैस क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) का पहला ट्रेन सेट गुजरात के सावली में अपने विनिर्माण संयंत्र से बाहर निकलने के बाद एल्सटॉम इंडिया द्वारा एनसीआरटीसी को सौंप दिया गया| कवच प्रौद्योगिकी और नई वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत के बाद, आरआरटीएस पेश होने से भारत में रेल यातायात का भविष्य सुनहरा दिखाई पड़ता है| 

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भारत के पहले आरआरटीएस कॉरिडोर (RRTS Corridor) का शिलान्यास, देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 08 मार्च 2019 को किया गया था| वर्तमान में इसका निर्माण कार्य चल रहा है| 

आरआरटीएस (RRTS Project) एक नई क्षेत्रीय रैपिड रेल प्रणाली है जो एक समर्पित रूट पर, उच्च गति, उच्च क्षमता और आरामदायक यात्री सेवा के साथ क्षेत्रीय नोड्स को जोड़ेगा| आरआरटीएस (RRTS Project), पारंपरिक रेलवे (भारतीय रेलवे) से अलग है क्योंकि यह विश्वसनीय, एक डेडिकेटेड पथ मार्ग पर अधिक फ्रीक्वेंसी पर चलेगी और उच्च गति पर एक जगह से दूसरी जगह क्षेत्रीय यात्रा प्रदान करेगा| साथ ही आरआरटीएस मेट्रो से भी अलग है क्योंकि यह यात्रियों को कम स्टॉप और उच्च गति के साथ अपेक्षाकृत लंबी दूरी की यात्रा करवाएगा| कुल मिलाकर आरआरटीएस (RRTS Project), भारत के पहले समर्पित सेमी हाई स्पीड रेल नेटवर्क  का उद्देश्य एनसीआर के विभिन्न नोड्स के बीच उच्च आवृत्ति और उच्च क्षमता कनेक्टिविटी प्रदान करना है| 

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आरआरटीएस कॉरिडोर पर भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज से अलग स्टैण्डर्ड गेज ट्रैक बिछाया जाएगा| 


कैसे होंगें RRTS के कोच (RRTS Coaches)

आरआरटीएस रेलवे ट्रेन का ट्रैक पारम्परिक रेलगाड़ी (भारतीय रेल) और मेट्रो के ट्रैक से पूरी तरह से अलग होगा| भारत की पहली क्षेत्रीय (regional) रेल सेवा  (RRTS Project) के कोच की डिजाइनिंग हैदराबाद और निर्माण सावली, गुजरात में किया गया है| इनके कोच को यात्रियों के लिए एक अच्छा यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है| आरआरटीएस नई ट्रेन में कुल छह कोच होंगे जिन्हें बाद में बढ़ाकर नौ किया जा सकता है| इन छह कोचों में से एक पूरी तरह से यात्रियों को प्रीमियम अनुभव प्रदान करने के लिए समर्पित होगा, जिसमें यात्रियों के लिए वाई-फाई जैसी विभिन्न सुविधाएं हैं| 

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ट्रेन के छह कोचों में टू-बाई-टू सीटिंग अरेंजमेंट में  कुल 407 सीटें होंगी| यह ट्रेन एक साथ 1500 यात्रियों को समायोजित करने में सक्षम है| ट्रेन के डिजाइन में ट्रेन की स्पीड को भी ध्यान में रखा गया है| इस कॉरिडोर पर चलने वाली वाली ट्रेनों की अधिकतम गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा और औसत गति 100 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी| इस प्रकार आरआरटीएस ट्रेन की स्पीड मेट्रो की औसत स्पीड से तीन गुना होगी|

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आरआरटीएस ट्रेनों (RRTS Project) के एक कोच में 1.4 मीटर चौड़े कुल छह स्वचालित दरवाजे होंगें| हर सीट के पास लैपटॉप/मोबाइल चार्जिंग पॉइंट मौजूद हैं| दिव्यांगों के लिए दरवाजे के पास ही व्हील चेयर की जगह दी गई है| सभी कोच सीसीटीवी कैमरा की निगरानी पर रहेंगे| आरआरटीएस ट्रेन का एक कोच महिलाओं के लिए आरक्षित होगा| 3.2 मीटर चौड़े आरआरटीएस कोच में यात्रियों के सामान रखने के लिए लगेज रैक की व्यवस्था की गई है| इसी के साथ कोच के अंदर स्टेशन इंडिकेटर और अनाउंसमेंट जैसी सुविधा होगी| यात्री आसानी से खड़े होकर यात्रा कर पाएं, इसके लिए हैंडल भी इनस्टॉल किये गए हैं|  

आरआरटीएस प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति (RRTS Project Update)

आरआरटीएस ट्रेन (RRTS Project) के कोच के निर्माण का पहला चरण 2021 में शुरू हुआ था और अब इसका परिक्षण बंद करके इस साल के अंत तक किए ट्रायल फेज शुरू करने की योजना है| 

पढ़ें: भारतीय रेलवे में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की जानकारी

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर (Delhi-Meerut RRTS Corridor) में से साहिबाबाद से दुहाई के 17 किलोमीटर के मार्ग को प्रायोरिटी कॉरिडोर के तहत बहुत तेज गति से बनाया जा रहा है| इस सेक्शन में आरआरटीएस ट्रेन के मार्च 2023 तक पटरियों पर दौड़ने की उम्मीद की जा रही है| 

दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (Delhi-Meerut RRTS)

दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस गलियारा (Delhi-Meerut RRTS Corridor) अनुमानित 82 किलोमीटर लंबा होगा जो दिल्ली को उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरेगा| यह गलियारा इस क्षेत्र के विकास के लिए फायदेमंद होगा और बड़ी संख्या में टाउनशिप और आर्थिक गतिविधि के केंद्रों को जोड़ने में मदद करेगा| 

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दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर (Delhi-Meerut RRTS Corridor) का रूट दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर मेरठ के मोदीपुरम तक जाता है| इसका कार्य नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (NCRTC) द्वारा किया जा रहा है| दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस के अंतर्गत कुल 22 स्टेशन हैं (Delhi-Meerut RRTS Route and Station)| मार्ग पर आने वाले स्टेशन इस प्रकार होंगे: 

1. सराय काले खां (Sarai Kale Khan)

2. न्यू अशोक नगर (New Ashok Nagar)

3. आनंद विहार (Anand Vihar)

4. साहिबाबाद (Sahibabad)

5. गाजियाबाद (Ghaziabad)

6. गुलधर (Guldhar)

7. दुहाई (Duhai)

8. मुरादनगर (Murad Nagar)

9. मोदी नगर साउथ (Modi Nagar South) 

10. मोदी नगर नार्थ (Modi Nagar North)

11. मेरठ साउथ (Meerut South)

12. प्रतापपुर 

13. रिठानी 

14. शताब्दीनगर 

15. ब्रह्मपुरी 

16. मेरठ सेंट्रल (Meerut Central)

17. भैसाली 

18. बेगमपुल (Begumpul)

19. एमईएस कॉलोनी 

20. दौरली 

21. मेरठ नार्थ (Meerut North)

22. मोदीपुरम (Modipuram)    

इस कॉरिडोर में चार स्टेशनों को भूमिगत और बाकि के स्टेशन एलिवेटेड बनाए जाएंगे| 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से डिज़ाइन किये जा रहे इस कॉरिडोर के निर्माण के बाद दिल्ली से मेरठ की यात्रा में 60 मिनट से भी कम का समय लगेगा| 

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दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर (Delhi-Meerut RRTS Corridor) के साथ आरआरटीएस फेज 1 के अंतर्गत दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत पर भी कार्य किया जाएगा| 

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